आत्मविश्वास बढ़ाने के सरल तरीक़े। How to build self confidence

आत्मविशवास

Table of content

• आत्मविश्वास (self confidence) क्या है और  आत्म-सम्मान (self-esteem)  क्या है?
• आत्मविश्वास का होना क्यों जरूरी है।
• आत्मविश्वास को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात।
• आत्मविश्वास बढ़ने से होने वाले फायदे।
• आत्मविश्वास बढ़ाने के तरीके।

Self confidence:- सेल्फ कॉन्फिडेंस का मतलब है कि आप खुद पर और खुद की क्षमताओं पर विश्वास करते हो कि आप कोई काम कर सकते हो। उदाहरण के तौर पर आपको विश्वास है कि आप लोगो से बात कर सकते हो। आपको विश्वास है कि आप अच्छा खाना बना सकती हो। आपको विश्वास है कि आप अच्छा लिख सकते हो।

Self esteem:- Self esteem का मतलब है कि आप अपने बारे में कैसा महसूस करते हो और आपकी
नज़रों में आपकी कितनी value है। High self-esteem रखने वाला कह सकता है। मेरी Body fit है। मेरे अंदर ऊर्जा (energy) भरी पड़ी है। Low self-esteem रखने वाला   व्यक्ति कह सकता है, मुझे लोगों के साथ बात करने में शर्म आती है क्योंकि में अपने दोस्तो जैसी answering नहीं कर पाता/पाती।

आत्मविश्वास का होना क्यों जरूरी है?

जो भी काम आप करते हो चाहे वो पढाई करना हो या दूसरो को पढ़ना हो या मंच पर भाषण देना हो या फिर सामने वाले से अपनी बात मनवाना हो आपको आत्मविश्वास की ज़रूरत होगी। जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए भी आपके अंदर प्रबल आत्मविश्वास होना चाहिए।
   आत्मविश्वासी बनना इसलिए भी ज़रूरी है क्योकि दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिन्हे सच में आपकी परवाह है।बाकी 99% लोग केवल अपना फायदा सोचते हैं जिन लोगों में आत्मविश्वास कम होता है वह अपने ज्यादातर फैसले दूसरों से प्रभावित होकर लेते हैं। इस तरह उनके जीवन के बागडोर उनके मित्रों, सगे-सम्बन्धियों, और हर उस व्यक्ति के हाथों में होती है जिनके संपर्क में वे आते हैं। आपको आत्मविश्वास इसलिए भी चाहिए कि आप अपने निर्णय स्वयं ले सको।

आत्मविश्वास बढ़ने से होने वाले फायदे।

आकर्षक व्यक्तित्व :- आप कमज़ोर झुकी हुई मुद्राओं का प्रयोग करना बंद कर देते हैं आपकी बॉडी लैंग्वेज बदल जाती है। आप नज़रें मिलाकर बात करते हैं आपकी आँखों में आत्मविश्वास झलकता है।

साहस :- आप डर से डरना बंद कर देते हैं आप कम्फर्ट जोन ( comfort zone ) में रहना बंद कर देते हैं जिससे आपके अंदर साहस का गुण विकसित होता है।

आत्मस्वीकृति और आनद भरा जीवन :- आप ज़िन्दगी का भरपूर मज़ा ले पाएंगे। आप खुद को पसंद करने लगेंगे। खुद को दोष देने और खुद को  छोटा समझने जैसी आदतें समय के साथ समाप्त हो जायेगीं।

प्रदर्शन में सुधार:- आत्मविश्वास बढ़ने से आप अच्छा प्रदर्शन करते हैं। कई सर्वे बताते हैं कि आत्मविश्वास बढ़ने से लोग बेहतर काम करते हैं।

आत्मविश्वास को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात।

कुछ लेखक और मोटिवेशनल स्पीकर हमें यह बताते हैं कि हमारे अंदर असीमित क्षमताएं हैं और अगर हम खुद पर यकीन कर ले तो हम सब कुछ हासिल कर सकते हैं। लेकिन सच क्या है?

एक लड़का जो फुटबॉल में कुछ खास अच्छा नहीं है उसे यह बोलने से कि अगर तुम खुद पर भरोसा कर लो तो तुम रोनाल्डो कि तरह एक उच्च स्तरीय खिलाड़ी बन सकते हो।
या एक लड़का जिसका आइक्यू कम है उसे यह बताना कि तुम खुद पर भरोसा कर लो और तुम्हारा IAS बनना पक्का है।

कई बार लोग इस तरह की बातें सुनकर मोटिवेट हो जाते हैं जब बहुत कोशिश के बाद रात दिन मेहनत करने के बाद भी रिजल्ट्स नहीं निकलते, जब गोल्स जिसके सपने आप देखते है अचीव नहीं होते तो वह यह सोचने लगते हैं कि गड़बड़ मेरे अंदर है और वह डिप्रेशन में चले जाते हैैं।
 
यहां अगर हम सच्चाई जान लें तो क्या होगा? हम समझ जाएंगे हम हर चीज में अद्भुत नहीं हैं। हम बिना सीमाओं के काम नहीं करते। हमारी सीमाएं होती हैं। खुद को सर्वशक्तिमान मान लेने से आप वैसे नहीं बन जाते।

लेकिन यहां यह कहना उचित होगा कि जिसने पूरी सृष्टि को बनाया है उसने आपको भी बनाया है और आपको कुछ खास गुण दिए गए हैं जो आपको दूसरों से अलग बनाते है। आपके भीतर ऐसी जबरदस्त शक्तियां हैं जिनको आपने नहीं खोजा है। आप खुद कोशिश इतना प्रतिभाशाली समझते है आप उससे ज्यादा अच्छा कर सकते हैं आप सफल व्यक्ति बन सकते हैं।

आत्मविश्वास बढ़ाने के तरीके।


सकारात्मक आत्मचर्चा करें
मानव मन को इस तरह बनाया गया है कि इसे ज्यादा देर तक शांत नहीं रखा जा सकता। जब हम किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में बात नहीं भी कर रहे हो तब भी हमारे मन में किसी न किसी बात को लेकर चर्चा होती रहती है।

Example:- यह मैंने क्या बोल दिया! अब वह मेरे बारे में क्या सोचेगी! उसे लगेगा कि मैं भी दूसरे लड़कों जैसा हूं।
क्या यह कंपनी मेरी सेवाएं खरीदेगी? मुझे लगता है कि यहां भी ना सुनने को मिलेगा। मैंने पहले भी एक कंपनी में try किया था जिसने मेरे ऑफर को बुरी तरह ठुकरा दिया था।
अगर मैंने कोशिश की और मैं फेल हो गया तो क्या होगा।
इसी तरह के ढेरों विचार हमारे माइंड में चल रहे होते हैं क्या आपने नोटिस किया है? कि जितनी भी बातें हम खुद से कहते हैं उसमें 90% बातें नकारात्मक होती हैं।

पर हम हमेशा ऐसे व्यक्ति तो नहीं थे हम बचपन में खुद से इस तेरह की बातें नहीं कहते थे फिर हमारे साथ ऐसा क्या हुआ कि हम ऐसे व्यक्ति बन गए जो अपनी आलोचना स्वयं करता है। दरअसल बचपन में हमारे पेरेंट्स, अध्यापकों, भाई-बहनों और उम्र में बड़े लोगो ने हमसे बार-बार इस तरह की बातें कहीं देखो ओह! मोहित, तुमने यह गलत तरीके से किया तुम्हारा जवाब गलत है। तुमने पानी सोफे पर गिरा दिया मैं तुम्हारा क्या करूं। तुमने फिर कपड़े गंदे कर लिए,  तुम एक बदतमीज लड़के हो जो दिन भर बस खेलता रहता है और अपना होमवर्क समय से पूरा नहीं करता।

आपने इस प्रकार के हजारों-लाखों संदेश ग्रहण किए हैं आपको आप खुद से यह कहने की आदत हो गई है मैं पढ़ाई में कमजोर हूं। मैं लापरवाही से काम करता हूं मेरी  communication skills अच्छी नहीं है।
इस तरह से आप अपना सेल्फ कॉन्फिडेंस कम कर लेते हैं आपको खुद से सकारात्मक वाक्य कहने की जरूरत है। अपने दिमाग को सकारात्मक वाक्य से इतना भर दें कि दिमाग से सारी गंदगी बाहर निकल जाए। खुद के बारे में सकारात्मक कथन कहने की आदत विकसित करें और आप पाएंगे कि आपका आत्मविश्वास बढ़ने लगा है।

अपनी क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करें
 हम पहले भी बता चुके हैं कि हम हर मामले में विशेष नहीं होते हैं कुछ कामों में हम अच्छे होते हैं और कुछ में बहुत खराब हो सकते हैं। हमारा आत्मविश्वास उस समय कमजोर पड़ने लगता है जब हम अपनी क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय अपनी कमजोरियों पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

हमें यह जानने की जरूरत है कि हमारे अंदर strength और weakness दोनों होंगी। आपको यह तय करना है कि किन कमजोरियों को सुधारा जा सकता है और किन कमजोरियों को नहीं सुधारा जा सकता। उदाहरण के तौर पर आपको स्टेज पर भाषण देने से बहुत डर लगता है इस कमजोरी को आप प्रैक्टिस के थ्रू दूर कर सकते हैं लेकिन अगर आपका आइक्यू लेवल कम है आपको math समझ नहीं आती तो इसे स्वीकार करें और चलें दूसरे बिंदु पर।

अपने मजबूत पक्ष को अधिक मजबूत बनाएं। अपनी क्षमताओं को जाने देखें कि आप किन कामों में अच्छे हैं उन्हें इस तरह करें कि कोई आप की बराबरी न कर पाए। इससे आप उत्साही अनुभव करेंगे और आपका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।


तुलना करना बंद करें
दूसरों के साथ तुलना करके खुद को कम मत समझो। यह हमारे अंतर ही हैं जो हमें अद्वितीय (unique) और सुंदर (beautiful) बनाते हैं।"  रॉबर्ट टिव
क्या हम तुलना करते हैं? कितनी बार? 1 या 2 बार। नहीं! जब-जब हमें मौका मिलता है हम खुद को दूसरों से कंपेयर करते हैं अगर हमें लगता है कि सामने वाला हमसे ज्यादा स्मार्ट हैं तो हमारे आत्मविश्वास का स्तर कम होने लगता है या अगर वे हमसे स्मार्ट नहीं है तो हम खुद को आत्मविशवास से भरा हुआ पाते हैं।

ड्रेस के आधार पर की गई तुलना :- आप एक पार्टी में जाती हैं, आप देखती हैं आपसे जैसी सुंदर ड्रेस किसी ने नहीं पहनी है। आपके फ्रेंड्स आपकी बहुत तारीफ करते हैं आप अच्छा महसूस करने लगती हैं। इतनी देर में सामने से एक दूसरी लड़की आती है जिसने आपसे अच्छा ड्रेस पहना होता है अब लोग उनकी और आकर्षित होने लगते हैं। आप भी यह मान लेते हैं कि उसका ड्रेस आपकी ड्रेस से अच्छा लग रहा है इसी तरह आप कई दूसरी चीज़ें भी खोज लेती हैं जैसे उसका मेकअप, उसका हेयर स्टाइल, आदि।

आप छोटा महसूस करने लगती हैं और जितना आप  कंपेयर करती है आपका आत्मविश्वास कम होता रहता है। तो आत्मविश्वास बढ़ाने का तीसरा शक्तिशाली तरीका यह है कि हमें खुद की तुलना किसी अन्य व्यक्ति से नहीं करनी चाहिए।


थोड़ा जोखिम लें
कहते हैं डर आत्मविशवास का दुश्मन होता है यह दोनों एक साथ एक ही जगह पर नहीं रह सकते। डर आत्मविश्वास को कम करता है। यहां डर से जीतने का अचूक फॉर्मूला बताया जा रहा है इमर्सन ने कहा था “हमेशा वही करो जिससे तुम डरते हो।” यहां इमर्सन का मतलब था जिन काम को करने से आपको डर लगता है वह बार-बार करो और आपके अंदर का डर समाप्त हो जाएगा। मैं आपसे यह नहीं कह रहा हूं कि अगर आपको मंच पर भाषण देने से डर लगता है तो आप सीधे ही भरी सभा के सामने भाषा देने जाएं। नहीं! आपको छोटे-छोटे जोखिम लेने हैं जैसे 100 लोगों के सामने बोलने से पहले एक व्यक्ति के सामने बोलने का अभ्यास करें। फिर 2/5/ 10... ऐसे संख्याओं को बढ़ाते चले जाएं। अपने सबसे अच्छे दोस्त के सामने भाषण देने की प्रैक्टिस करें। गलतियों को सुधारते रहे और आप यह देकर हैरान रह जाएंगे कि धीरे-धीरे आपका आत्मविश्वास बढ़ रहा है।

आत्मविश्वासी होने की मानसिकता तस्वीर देखें
फ्रायड ने यह साबित कर दिया है कि हमारा अधिकतर व्यवहार अचेतन तंत्रों से तय होता है जिन मानसिक तस्वीरों को हम बार बार देखते हैं वह हमारे अचेतन तंत्रों का हिस्सा बन जाती हैं।
उदाहरण के तौर पर, सुरेश मन में इस प्रकार की  मानसिक तस्वीरें देखता हैं जैसे वे आज ऑफिस के लिए लेट हो गया और बॉस ने उसे खरी-खोटी सुनाई। इस तरह की अप्रिय घटनाओं की मानसिक फिल्में आपके  आत्मविश्वास को कमजोर बनाती हैं। मन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि जो मानसिक तस्वीरें/फिल्में आप  देखते हैं वे सकरात्मक है या नकारात्मक।
यह उस इनपुट पर कार्य करता है जो आप मानसिक तस्वीरों के रूप में इस देते हैं नकारात्मक तस्वीरों के परिणाम भी नकारात्मक होंगे। नकारात्मक तस्वीरों को अपने दिमाग से पूरी तरह निकाल लें खुद की ऐसी तस्वीर देखे हैं जिसमें आपका पूरा विश्वास के साथ काम कर रहे हो और सफलता की और जा रहे हों। स्पष्ट तस्वीरें देखें। अपनी पांचों इंद्रियों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें।


अपनी शब्दावली को बदल दें


शब्दों को सावधानी से संभालें, क्योंकि इनमें परमाणु बमों की तुलना में अधिक शक्ति होती है। ”प्राण स्ट्रेचन हर्ड

हमारे द्वारा कहे जाने वाले शब्द हमारी जिंदगी पर बहुत गहरा प्रभाव डालते हैं।
अपने द्वारा कहे जाने वाले शब्दों के बारे में जागरूक बने ।समय निकालकर उन शब्दों को लिखें जिनका प्रयोग आप अधिकतर समय करते हैं अगर वह नकारात्मक है तो उनके स्थान पर सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करें। ऐसे शब्द बोलें जो दयालु हों, प्यार करने वाले हों, सकारात्मक हों, उत्थान करने वाले हों, उत्साहवर्धक हों और जीवन देने वाले हों। 
खुद से सकारात्मक शब्द कहना मुश्किल लग सकता है लेकिन खुद को बार-बार याद दिलाएं कि आप कमजोर शब्दों का प्रयोग नहीं करेंगे बल्कि आत्मविश्वास से भरे शक्तिशाली शब्दों का प्रयोग करेंगे।


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